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डीएफओ ग्रीष्मी चाँद के आदेश हवा में, मरवाही में वनकर्मी बने फैसलों के असली मालिक ?”

डीएफओ ग्रीष्मी चाँद के आदेश हवा में, मरवाही में वनकर्मी बने फैसलों के असली मालिक ?”

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही:- मरवाही वनमंडल में भ्रष्टाचार और अवैध पकड़ का ऐसा जाल बिछा हुआ है कि डीएफओ स्तर के आदेश भी जंगल में हवा की तरह गायब हो रहे हैं। विभाग में अनुशासन और प्रशासन की स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि DFO ग्रीष्मी चाँद द्वारा जारी दर्जनों आदेश आज तक लागू नहीं हो सके।सूत्रों के अनुसार, आरोपों और शिकायतों में घिरे 11 वनरक्षक और 11 वनपालों की ड्यूटी बदलने का आदेश DFO ने जारी किया था, मगर किसी भी वनकर्मी ने आदेश का पालन करना जरूरी नहीं समझा। इससे विभाग में अनुशासन की दुर्दशा और वनकर्मियों की पकड़ साफ नज़र आती है।

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खोड़री परिक्षेत्र में आदेश लागू होने का नाम नहीं !

खोड़री परिक्षेत्र सहायक उदय तिवारी के निलंबन के बाद झल्ली मार्को को पदस्थ किया गया था, लेकिन यह आदेश भी धरा रह गया। हैरानी की बात यह है कि खोड़री परिक्षेत्र का वास्तविक प्रभार किसके पास है—विभाग खुद स्पष्ट नहीं कर पा रहा।

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पकरिया में भी आदेश की नहीं कोई परवाह,पकरिया परिक्षेत्र में सहायक महेंद्र तिवारी को हटाकर अखंड प्रताप की पदस्थापना की गई थी, पर आदेश लागू नहीं हुआ। कर्मचारियों की मनमानी इस कदर है कि विभागीय आदेश भी अब “सब्जेक्ट टू अप्रूवल ऑफ़ वनकर्मी लॉबी” की तरह दिखने लगे हैं।अन्य आदेश भी फाइलों में कैद वायरलेस ऑपरेटर पुरुषोत्तम कश्यप को प्रभारी स्टेनो से हटाकर मड़नाडीपो भेजने का आदेश — लागू नहीं। सहायक ग्रेड-2 भूपेंद्र साहू का स्थानांतरण — अधर में। कैम्पा शाखा में किए गए बदलाव — सिर्फ कागज़ों में।“वनकर्मी तय करते हैं आदेश का पालन, स्थानीयों की प्रतिक्रिया स्थानीयों और विभागीय सूत्रों का कहना है कि मरवाही वनमंडल में निर्णय लेने की असली ताकत वनकर्मियों और उनकी बाहरी पकड़ के पास है। लोगों का तंज है “मरवाही में डीएफओ नहीं, कोई और तय करता है कि कौन कहाँ बैठेगा।”

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भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी कि व्यवस्था बेबस !

वनमंडल में भ्रष्टाचार, सांठगांठ और बाहरी संरक्षण की वजह से कर्मचारी इतने प्रभावशाली हो चुके हैं कि विभागीय आदेशों की धज्जियाँ उड़ाना सामान्य बात बन चुकी है। यह स्थिति पूरे वन विभाग की छवि पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

 

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